आप तो ऐसे न थे
सुशील दीक्षित "विचित्र "
भाईजी आप तो ऐसे न थे । आप की कमीज सबकी कमीज से सफ़ेद बताई जाती थी लेकिन आप की कमीज तो और भी काली निकली । शायद इसीलिये अब कमीज तार तार कर दी गयी है । भला हो आपका भला चाहने बालों का जिन्होंने कम से कम कालर और बटन बाली पट्टी छोड़ दी भाई जी वही स्वराजी टाई बन कर इस समय आप की आबरू बचाये है। तो भाई कुछ करो । निशेष कालर व बटन पट्टी वाली कमीज जनता न नोच डाले उससे पहले भाईजी कुछ करो ।कुछ ऐसा करो भाई जी की विरोधी चारोखाने चित्त ही नहीं हो जाए बल्कि षाष्टांगों सहित पतित भूतले हो जाएँ । इसी में आप का कल्याण है और "आप" का भी । जनता के मूड का कुछ पता नहीं चलता भाईजी । अभी वह आप की ओर देख रही है । आप ने जो सपने दिखाए थे न अभी वह उन्हीं में खोई हैं । इतना पंकस्नान गलियों में हुआ कि अपने कई जनप्रतिनिधों का चेहरा भी जनता नहीं पहचान पा रही है। आप के पुराने साथी , भाई जी आप की नौतिकता का गला पकड़ कर झिंझोड़ रहे हैं । आप जैसे स्टिंग विशेषज्ञ के स्टिंग की बात कह कर आप की ईमानदारी को सरेबाजार उँगलियाँ रहे हैं । भाई जी जितना मुंह उतनी बाते बाली बात गलत साबित हो रही है। यहाँ तो मुंह कम पड़ रहे है और बाते बढ़ती जा रहीं हैं । आप की झाड़ू की सींके बिखरने लगी हैं । इसलिए भाई जी कुछ करो। कुछ करो भाई जी कुछ करो ।
सुशील दीक्षित "विचित्र "
भाईजी आप तो ऐसे न थे । आप की कमीज सबकी कमीज से सफ़ेद बताई जाती थी लेकिन आप की कमीज तो और भी काली निकली । शायद इसीलिये अब कमीज तार तार कर दी गयी है । भला हो आपका भला चाहने बालों का जिन्होंने कम से कम कालर और बटन बाली पट्टी छोड़ दी भाई जी वही स्वराजी टाई बन कर इस समय आप की आबरू बचाये है। तो भाई कुछ करो । निशेष कालर व बटन पट्टी वाली कमीज जनता न नोच डाले उससे पहले भाईजी कुछ करो ।कुछ ऐसा करो भाई जी की विरोधी चारोखाने चित्त ही नहीं हो जाए बल्कि षाष्टांगों सहित पतित भूतले हो जाएँ । इसी में आप का कल्याण है और "आप" का भी । जनता के मूड का कुछ पता नहीं चलता भाईजी । अभी वह आप की ओर देख रही है । आप ने जो सपने दिखाए थे न अभी वह उन्हीं में खोई हैं । इतना पंकस्नान गलियों में हुआ कि अपने कई जनप्रतिनिधों का चेहरा भी जनता नहीं पहचान पा रही है। आप के पुराने साथी , भाई जी आप की नौतिकता का गला पकड़ कर झिंझोड़ रहे हैं । आप जैसे स्टिंग विशेषज्ञ के स्टिंग की बात कह कर आप की ईमानदारी को सरेबाजार उँगलियाँ रहे हैं । भाई जी जितना मुंह उतनी बाते बाली बात गलत साबित हो रही है। यहाँ तो मुंह कम पड़ रहे है और बाते बढ़ती जा रहीं हैं । आप की झाड़ू की सींके बिखरने लगी हैं । इसलिए भाई जी कुछ करो। कुछ करो भाई जी कुछ करो ।
भाई जी अभी आप का मुलम्मा जनता पर से उतरा नहीं है । वह आप के अलावा किसी को नहीं पहचानती । उसने सारे के सारे वोट आप की झोली में डाले हैं न की किसी अपने जन प्रतिनिधि की झोली में । भाई जी जैसे भारत की जनता केवल मोदी को जानती है उनकी पार्टी को नहीं वैसे ही राजधानी में आप की स्थिति है । आप के मतलब केवल आप ही हैं भाई जी । आप राजधानी के मोदी हैं । जैसे भारत की जनता मोदी के सामले सवालों के पहाड़ खड़े करेगी वैसे ही वह नींद खुलते ही और सपने बिखरते ही आप के सामने सवालों के ढेर लगा देगी । इसलिए कुछ करो भाईजी । किसी तरह साबित करो की अपने हमसफ़र रहे विरोधियों के पंक प्रक्षेपण के बावजूद अभी आप की बची खुची कमीज साफ़ । इसलिए जनता को बताओ भाईजी कि यह इस पार्टी या उस पार्टी का षड्यंत्र है। स्टिंग स्टिंग खेलना केवल और केवल आप का ही जन्म सिद्ध अधिकार है । आप के अलावा हर स्टिंग खेलने वाले की नीयत में खोंट है।घोषणा करो कि आप का शुगर लेवल घट गया है और अब आप को खांसी भी नहीं आती । आप ने बिजली , पानी जैसी घोषणाएं की हैं भाई जी वे काफी नहीं हैं और आप के मिजाज से मेल भी नहीं खातीं इसलिए आप कुछ ऐसी घोषणाएं कीजिये की आमुक अमुक पार्टी विरोधी थे , तमुक तमुक पार्टी पर कब्ज़ा करना चाहते थे और ठुमुक ठुमुक कार्यकर्ताओं को गुमराह कर रहे है है । जल्दी कुछ कीजिये भाईजी , कुछ भी कीजिये भाईजी लेकिन कुछ कीजिये वरना अभी तो कुछ लोग ही कह रहे हैं ,कल सभी लीग कह सकते हैं की आप तो ऐसे न थे।
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