शुभ्रा सक्सेना डी एम
दुआ , दवाओं ने किया , फ़्लू का काम तमाम ।
कस कर पकड़ा आपने ,फिर जनपद का काम ।
जिला अब एक नंबरी
कृष्णा राज
अच्छे दिन की आस में , लोग रहे दिन काट।
अच्छो अच्छों की खड़ी, जनता करती खाट ।
इसलिए लगो काम पर ॥
मिथलेश
फिर से सांसद बनूँगा , मन में यही हिलोर |
मगर पार्टीजन कहें, ख़त्म हुआ सब जोर |
भार हो तुम साइकिल पर ॥
सुरेश खन्ना
बरगद भारी हो गया , घनी हो गयी छाँव ।
लेकिन शहर कराहता , सिसक रहे हैं गाँव ।
शीश धुनते मतदाता ॥
नीरज कुशवाहा
औधे हौदे में पड़े सोंच रहे दिन रात ।
आएं फिर से बहनजी, तो बन जाए बात ।
काम से क्या है मतलब ॥
रोशन लाल
सब पर तो काबिज सपा ,कहाँ करूँ क्या काम ।
माया पर भी मेहरवाँ , अब शायद हों राम
मौज अब नहीं पुरानी ॥
शंकुतला
छू कर चरण समेटती थी , झोली में वोट ।
बिछी विसातें हैं मगर , पिटी बालम की गोट ।
कमल की राह का रोड़ा ॥
राजेश यादव
पहले नाला भी बढे , दौड़े यह राजेश ।
अब डूबे सब क्षेत्र भी , इन्हें नहीं कुछ क्लेश ।
यही है नेतागीरी ॥
जयेश प्रसाद
जब से यारों हो गया , हाथी रहित प्रदेश ।
सर हाथों पर टेक कर सोंचा करें जयेश ।
कमल लें या कि साईकिल ॥
नीतू सिंह
इनके लिए तो मौज है , बलमा का हर खेल ।
पंचायत का भले ही ,वो निकाल ले तेल ।
नाम की है अध्यक्षी ॥
राम मूर्ति सिंह वर्मा
लढ़िया भर वादे करे , और समेटे वोट।
मंत्री पद की हो गयी, जब है से फिट गोट ।
नहीं अब ढूंढे मिलते ॥
तनवीर
सिंगल चेचिस हैं मगर नाम रखे तनवीर ।
दाम चुकाते आप हैं दढ़ियल खाताखीर ।
यही तो खूबी इनकी ॥
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