कम्पनियां तो निराकार आहे
सुशील विचित्र
क्या यार , हमने चंदा ले लिया तो सब कीचड़ को बाल्टियाँ लेकर मेरे पीछे ही पड़ गए । अरे किसने चंदा नहीं लिया ? कौन कह सकता है कि मैया मोरी मैं नहीं चंदा खायों ? अभी उस दिन बदरू कमले की लड़की की शादी थी तो वह तो लोगों से खुले आम चंदा ले रहा था तब तो कोई नहीं बोला । अच्छा आप कहते हैं कि लड़की की शादी में सब लेते हैं तब बनारसी पंजू के लडके की शादी थी तो वह भी तो चंदा ले रहा था । भैया मैंने खुद अपनी आँखों से देखा और खुद लिफाफा दे कर उस का स्टिंग आपरेशन भी किया । देखेंगे मोबाइल में । क्या कहा आप ने, वह व्यवहार होता है।अच्छा उसदिन बहन जी जो ले रहीं थी वह क्या था? क्या? वह जन्मदिन का गिफ्ट था । वाह भाई वाह । यानि आप ने लिया वह व्यवहार होता है ,गिफ्ट होता है और हमने लेलिया वह चंदा हो गया ।चंदा भी कैसा चंदा ?तारकोल से सना हुआ चंदा । क्या बोले आप ? रात के बारह बजे चन्दा लिया ? अरे किसी ने दिन में भी चंदा निकलते देखा है? और यह काला धन कैसे हो गया? चेक लिया था जो कि काला नहीं रंगीन था। हाँ आप की यह बात दद्दू मैं भी मानता हूँ कि दाता कम्पनियाँ कही ढूंढें नहीं मिलीं । तो दद्दू दाता को आज तक किसने देखा। वह भी तो ढूंढें नहीं मिल रहा है। सदियों से साधू सांत फ़क़ीर उसे खोज रहें हैं मगर कहाँ मिलता है। जैसे वह निराकार है वैसे कंपनिया भी निराकार हैं । तो दद्दू मेरे चंदे पर सवाल उछालना निराकार की सत्ता पर सवाल उछालना है। इसलिए दद्दू चंदे की चांदमारी अब बंद भी करो
१३६, दिलवारगंज
शाहजहाँपुर २४२००१
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