शाहजहाँपुर । साहित्यिक संस्था प्रवाह की गोष्ठी भुवनेश्वर शोध संस्थान के महासचिव डॉ0 राजकुमार शर्मा के अब्दुल्लागंज स्थित निवास संपन्न हुई । गोष्ठी का शुभारम्भ दीपक कंदर्प द्वारा माँ वीणापाणी की वंदना से किया गया ।
गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए हुए वरिष्ठ कवि दादा ओमप्रकाश अडिग गीत सृजन की भावभूमि पर प्रकाश डाला---------
जितना चलूँ शब्द में उतना मैं ही खो जाऊं ,
कभी कभी तो पूर्ण स्वयं में में कविता जाऊं।
प्रसिद्द गीतकार कृष्णधार मिश्र ने सृष्टि विखंडन कवि दुःख प्रकट किया -----
आदि अनुष्टुप का दुख मेरे
गीत अगर दोहराते हैं ,
तो क्या हुआ क्रौंच बेचारे
अब मारे जाते हैं
गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए हुए वरिष्ठ कवि दादा ओमप्रकाश अडिग गीत सृजन की भावभूमि पर प्रकाश डाला---------
जितना चलूँ शब्द में उतना मैं ही खो जाऊं ,
कभी कभी तो पूर्ण स्वयं में में कविता जाऊं।
प्रसिद्द गीतकार कृष्णधार मिश्र ने सृष्टि विखंडन कवि दुःख प्रकट किया -----
आदि अनुष्टुप का दुख मेरे
गीत अगर दोहराते हैं ,
तो क्या हुआ क्रौंच बेचारे
अब मारे जाते हैं
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