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शनिवार, 4 फ़रवरी 2012
बैठी है एक शाम
अनमनी उदास
बुझे हुए चूल्हे के पास
पग पग पर
ठग डाकू चोर बटमार भरे
मचा हुआ भेड़ियाधसान
जंगल में होते
तो शायद बच जाते
अपना था शहर में मकान
गीदड़ों , लोमड़ियों ने मिल कर सिखला दिया
भेड़ों को पचा लेना मास
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